बिना श्रेणी

ये मेरा दोष है?

ये मेरा दोष है?

अपने वार्डरोब से जल्दी से साड़ी निकालकर पहन ली और पर्स के साथ हॉस्पीटल चेकअप की फ़ाइल लिए हुए सुविधा ने रूम लोक किया ।इतने में नीचे के रूम से आवाज़ आयी “कितनी देर लगाती हो महारानी ?अभी तक मेकअप कर रही हो क्या ? ” उस की सास जानकीदेवी आवाज़ लगा रही थी । ये सुनकर जल्दी से “हां,आई… Read more →

स्वरिता

स्वरिता

‘अरे ,चलो देर हो रही है ‘कहते हुँऐ अंगना अपनी छोटी सी बेटी स्वरिता को हाथ खींचकर कार में बिठाने लगी । ‘नहीं आना हे मुझे आपके साथ मम्मा,मुझे यहाँ पापा के पास खेलना है ,आप तो हमेंशा डाँटती रहती हो ,पापा नहीं डाँटते ” “ओके बाबा ,अब मैं भी नहीं डाटूँगी बस ?’ कहकर अंगना ने प्यार से कार… Read more →

अजनबी शाम

अजनबी शाम

  ऐक हसी शाम अजनबी सी हो गई, मेरी सांसे भी अनकही सी हो  गई। वो चहेरे तो कभी आंखो में न मिले, जिन की परछाईयां प्यारी सी हो गई। हम उन से जब ज़रा से दूर गये थे , भीड में ये तन्हाई तन्हा सी हो गई। दिल की कच्ची ज़मी पर आना उनका , और ,लहू की झील… Read more →

काव्य

काव्य

वही तो एक लम्हा जो मीला मुश्किल से, जाने क्यूं कतराके निकल गया मेरे दिल से । गैरते-महेफिल का ये असर तो देखिये, आज तक मेरा दिल बात न कर सका उसके दिल से। वक्त ने  खडी की उस दिवार को तो गीरा भी दूॅ, डरती हूॅं शायद न निकाल सकूॅं, वो खलीश मेरे दिल से ।   -मनीषा ‘जोबन’… Read more →

कहानी=कुछ तूटा है दिल में

कहानी=कुछ तूटा है दिल में

मानसी बहेेती नदी की लहरों को रेलिंग के पास खड़ी हुई एकटक देखे जा रही थी ।बस ,ये ज़िंदगी तो यूँही बहेती जा रही है ।और उसका पूरा भावविश्व एक जगा जैसे ठहर गया है । बचपन के दिनों में यहाँ बैठकर पापा मम्मी के साथ खुशियो की फुहारें उड़ा करती थी ,घंटों बैठकर बातें किया करते ,, छोटी छोटी… Read more →

लेख-                                                                                                      मनीषा जोबन देसाई

लेख- मनीषा जोबन देसाई

स्त्री और पुरुष इस विश्व की धरोहर माने जाते हे । कही दोने में से कोई एक या दूसरे से ज्यादा जरुरी या ताकतवर है, उसके विवाद में न पड़ते हुए ,एक बात तो तय है की स्त्रीओ को जरूर कुछ ऐसी अनदेखी शक्तियां मिली है । इतने युगों से धरती पर जितने भी परिवर्तन आये है उसमे बार बार… Read more →

कहानी-समझौता

कहानी-समझौता

अभी तो सुबह के ८-३० हुए थे । जल्दी तैयार होकर नित्या एक्स्ट्रा क्लास के लिए अपनी कार लेकर निकल ही रही थी कि बाहर रीमा आंटी और उनकी बड़ी बहु सब्जी ले रहे थे। उनको ‘गुड़ मोर्निग’ कहकर बातें करने खड़ी रही। ,’क्यों आज जल्दी जा रही हो ?’ ‘हां, ट्राफीक की वजह से पहुंचने में शायद देर हो… Read more →

कहानी-  मेरा आत्मसन्मान

कहानी- मेरा आत्मसन्मान

      रात ऐसे मध्यमसी ढल रही थी । अपनी बाल्कनी से नीचे झांकते हुवे, रितीमा विहार का इंतज़ार कर रही थी ‍‍‍।धीमी बारिश भी आ रही थी ,बारिश की बूंदों की ठंडक उसे अकेले बिलकुल नहीं भा रही थी। आज इतनी देर क्यों हुई होगी ?,सोचकर एक बार और मोबाईल जोड़ा ,सामने से आउट ऑफ़ रेंज देखकर हैरान रह गयी ,ऐसा भी क्या काम… Read more →

कहानी-शाम का साया

कहानी-शाम का साया

 तेज़ दौड़ती हुई ट्रेन की खिड़की के पास बैठी हुई तक्षवी, उड़ती हुई लटो को संभालती घडी में टाइम देख रही थी । बस, अब आधा घंटा रहा होगा।शिमला से ओर एक ट्रेन चेंज करके आगे टे़न सहसागढ जा रही थी।उसके हसबैंड ७-८ महिने पहले तबादला होने की वजह से यहाँ आये थे और वो बच्चों की स्कूल के बाद में टूर… Read more →

कहानी-मेरा विश्र्वास

कहानी-मेरा विश्र्वास

यूंही मालॅ में घूमते हुए आठ बज चुके थे। मौनवी ने मोबाईल से नरीत को बताया ,’अभी मुझे थोड़ी देर लग जायेगी ,मै अपनी ड्रेसमेकर के यहाँ जाकर आउंगी । खाना खा लेना जल्दी और मेरे घर पहुंचो। सब डिज़ाइन कन्फर्म है और मटीरिअल भी फाइनल हो गए है, बस थोड़ा समझा कर निकल आती हुं। ‘‘मै अकेला तुम्हारे पापा- मम्मी से बात करते हुए बोर हो जाऊँगा ,घर… Read more →

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