काव्य

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वही तो एक लम्हा

जो मीला मुश्किल से,

जाने क्यूं कतराके

निकल गया मेरे दिल से ।

गैरते-महेफिल का

ये असर तो देखिये,

आज तक मेरा दिल

बात न कर सका उसके दिल से।

वक्त ने  खडी की उस

दिवार को तो गीरा भी दूॅ,

डरती हूॅं शायद न

निकाल सकूॅं,

वो खलीश मेरे दिल से ।

 

-मनीषा ‘जोबन’

 

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architect-interior designer,writing gujarati -hindi haiku ,kavya ,gazal ,stories

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